Wednesday, August 5, 2015

Hello Friend ,


                                                    

ऐ जिंदगी तेरा सफर भी बहुत निराला हैं

ऐ जिंदगी तेरा सफर भी बहुत निराला हैं
कभी खुशियाँ भर -भर के देता हैं
तो कभी गम के आँसू रुलता हैं
कभी छप्पर फाड़ के देता हैं
तो कभी बेवजह संघर्ष करता हैं
ऐ जिंदगी तेरा सफर भी बहुत निराला हैं……
कभी मोंत का दावत ले के अता हैं
तो कभी के मुह से ले के अता हैं
ऐ जिंदगी तेरा सफर भी बहुत निराला हैं……
शायद इसलिए ऐ जिंदगी तेरा सफर बहुत प्यारा हैं




                                                                                                                              Ravi Mishra 

Monday, August 3, 2015

Hello Friend,


  अब इख़्तियार में मौजें न ये रवानी है
मैं बह रहा हूँ कि मेरा वजूद पानी है

मैं और मेरी तरह तू भी इक हक़ीक़त है
फिर इस के बाद जो बचता है वो कहानी है

तिरे वजूद में कुछ है जो इस ज़मीं का नहीं
तिरे ख़याल की रंगत भी आसमानी है

ज़रा भी दख़्ल नहीं इस में इन हवाओं का
हमें तो मस्लहतन अपनी ख़ाक उड़ानी है

ये ख़्वाग-गाह ये आँखें ये मेरा इश्क़-ए-क़दीम
हर एक चीज़ मिरी ज़ात में पुरानी है

वो एक दिन जो तुझे सोचने में गुज़रा था
तमाम उम्र उसी दिन की तर्जुमानी है

नवाह-ए-जाँ में भटकती हैं ख़ुशबुएँ जिस की
वो एक फूल कि लगता है रात-रानी है

इरादतन तो कहीं कुछ नहीं हुआ लेकिन
मैं जी रहा हूँ ये साँसों की ख़ुश-गुमानी है 



                                                                                                                      Ravi Mishra 

Sunday, August 2, 2015

Hello Friend ,

                                            
हे तुम फिर से,
इस धरा पर आओ।
 

 
नव सृजन के के,
गीत फिर से गाओ।
हे राम तुम फिर से,
इस धरा पर आओ।
 
भक्त अब फिर से डरे हैं,
संत भी सहमे खड़े हैं।
इस अंधकार और निशा से,
तुम हमें बचाओ।
हे राम तुम फिर से,
इस धरा पर आओ।
 
घर-घर और गांव-गांव में,
रावण राज्य कर रहा है।
बेबस हर व्यक्ति यहां पर,
केवल सांसें ले रहा है।
इस विकट और विषम परिस्थिति से,
तुम आके उबार जाओ।
हे राम तुम फिर से,
इस धरा पर आओ।
 
पशु-पक्षी कर रहे हैं क्रंदन,
शबरी कब से दर पर खड़ी है।
अहिल्या चौखट को निहारती,
भ्रूण  हत्या की कहानी कह रही है।
इस अजब दुखदायक घड़ी में,
नवसृजन, नवनिर्माण के गीत गाओ।
हे राम तुम फिर से,
इस धरा पर आओ।
 
धर्म और सत्य की,
पुनर्स्‍थापना कर जाओ।
हे राम तुम फिर से,
इस धरा पर आओ।
 
 
 
 
                                                                                                   Ravi Mishra 
Hello Friend,

                                        
दर्द होरी के आंगन में उतरा हो
आंखें जुम्मन की भर आए
की चौपाइयां
और कुरान के पैगाम
जहां साथ बैठकर
सुनाए जाएं
चलो 
ऐसा मजहब चलाएं
जहां इंसानियत के गीत गाए जाएं।
 
सुन के मंदिर के नगाड़े जहां
मीर साहब गले से लग जाएं
हो मस्जिद में अजान जब
पंडितजी सम्मान में बैठ पाएं
 
ईद ‍की सिवइयां दिवाली के दीये
साथ मिल के खिलाई-सजाए जाएं
सपने अकबर ने जो आंखों में पाले
अमर की नजरों से देखे जाएं
 
चाहे मदरसे हों या गुरु आश्रम
गीत देशभक्ति के केवल गाए जाएं
चाहे गुरुद्वारा हो या गिरजाघर
केवल नफरत समाप्त करने के संदेश आएं
 
केवल एक सपना आंखों में पालें
सबसे बेहतर हो हिन्दुस्तान वाले
केवल तरक्की और विकास के
सपने आंखों में पाले जाएं
 
झंडा ऊंचा रहे हमारा
ये सपने लेकर जिंदा रहें
और इसी सपने को पूरा
करते हुए खप जाएं
 
चलो 
ऐसा मजहब चलाएं
जहां इंसानियत के गीत गाए जाएं।
 
 
 
                                                                                                                                Ravi Mishra 

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